शनिवार, 24 अक्टूबर 2020

आपसी एकता की बाधाए -एक कहानी


 


एक बार की बात है एक गधा पेड़ से बंधा था।

शैतान आया और उसे खोल गया।

गधा मस्त होकर खेतों की ओर भाग निकला और खड़ी फसल को खराब करने लगा।

किसान की पत्नी ने यह देखा तो गुस्से में गधे को मार डाला।

गधे की लाश देखकर गधे के मालिक को बहुत गुस्सा आया और उसने किसान की पत्नी को गोली मार दी। 

किसान पत्नी की मौत से इतना गुस्से में आ गया कि उसने गधे के मालिक को गोली मार दी।

गधे के मालिक की पत्नी ने जब पति की मौत की खबर सुनी तो गुस्से में बेटों को किसान का घर जलाने का आदेश दिया।


बेटे शाम में गए और मां का आदेश खुशी-खुशी पूरा कर आए। उन्होंने मान लिया कि किसान भी घर के साथ जल गया होगा।


लेकिन ऐसा नहीं हुआ। किसान वापस आया और उसने गधे के मालिक की पत्नी और बेटों, तीनों की हत्या कर दी।


इसके बाद उसे पछतावा हुआ और उसने शैतान से पूछा कि यह सब नहीं होना चाहिए था। ऐसा क्यों हुआ?


शैतान ने कहा, 'मैंने कुछ नहीं किया। मैंने सिर्फ गधा खोला लेकिन तुम सबने रिऐक्ट किया, ओवर रिऐक्ट किया और अपने अंदर के शैतान को बाहर आने दिया। इसलिए अगली बार किसी का जवाब देने, प्रतिक्रिया देने, किसी से बदला लेने से पहले एक लम्हे के लिए रुकना और सोचना ज़रूर।'


ध्यान रखें। कई बार शैतान हमारे बीच सिर्फ गधा छोड़ता है और बाकी विनाश हम खुद कर देते हैं !!


और  हाँ, आपको ये भी समझना है कि गधा कौन हैं?


हर रोज टीवी चैनल गधे छोड़ जाते हैं, 


कोई ग्रुप में गधा छोड़ देता है। 


दोस्तों के ग्रुप में और पार्टी बाजी या विचारधारा के चक्कर में आप और हम लड़ते रहते हैं।


मिल जुल कर मुस्कुरा कर खुशी से रहिये

याद रखें-


तोड़ना आसान है जुड़े रहना बहुत मुश्किल है,

लड़ाना आसान है मिलाना बहुत मुश्किल .l.      

 एक बार की बात है एक साहूकार के चार बेटे थे। जब जमींदार बूढ़ा हो गया तो उसने उन्हें बुलाया और समझाया कि एक बन के रहोगे तो कोई तुम्हें बिजनेस में नही हरा पायेगा। वे सब इसे समझ नहीं पाये । वे सब आपस में लड़ते रहते और अपना नुकसान करते। 

एक दिन साहूकार ने उन्हें अपने पास बुलाया और सबको एक एक लकड़ी का टुकड़ा दिया और उसे तोड़ने के लिए कहा। सबने आराम से इसे तोड़ दिया।

पुनः साहूकार ने चार लकड़ियों को एक साथ तोड़ने के लिए कहा अब कोई इसे तोड़ नहीं पाया।तब साहूकार ने समझाते हुए आपसी सहयोग की ताकत बताई।







सकारात्मक सोच एक कहानी






 🔆 इंसान अपने विचारों से निर्मित प्राणी है, वो जैसा सोचता है वैसा बन जाता है.

एक राजा के पास कई हाथी थे लेकिन एक हाथी बहुत शक्तिशाली था, बहुत आज्ञाकारी, समझदार व युद्ध-कौशल में निपुण था, बहुत से युद्धों में वह भेजा गया था और वह राजा को विजय दिलाकर वापस लौटा था। इसलिए वह महाराज का सबसे प्रिय हाथी था।


समय गुजरता गया  ...



और एक समय ऐसा भी आया, जब वह वृद्ध दिखने लगा।


अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर पाता था।

इसलिए अब राजा उसे युद्ध क्षेत्र में भी नहीं भेजते थे।


एक दिन वह सरोवर में जल पीने के लिए गया, लेकिन वहीं कीचड़ में उसका पैर धँस गया और फिर धँसता ही चला गया।


उस हाथी ने बहुत कोशिश की,

लेकिन वह उस कीचड़ से स्वयं को नहीं निकाल पाया।


उसकी चिंघाड़ने की आवाज से लोगों को यह पता चल गया कि वह हाथी संकट में है।


हाथी के फँसने का समाचार राजा तक भी पहुँचा।

 

राजा समेत सभी लोग हाथी के आसपास इक्कठा हो गए और विभिन्न प्रकार के शारीरिक प्रयत्न उसे निकालने के लिए करने लगे।


लेकिन बहुत देर तक प्रयास करने के उपरांत कोई मार्ग नही निकला


तभी गौतम बुद्ध मार्गभ्रमण कर रहे थे। राजा और सारा मंत्रीमंडल तथागत गौतम बुद्ध के पास गये और अनुरोध किया कि आप हमे इस बिकट परिस्थिति मे मार्गदर्शन करे.

गौतम बुद्ध ने सबके घटनास्थल का निरीक्षण किया और फिर राजा को सुझाव दिया कि सरोवर के चारों और युद्ध के नगाड़े बजाए जाएँ।


सुनने वालो को विचित्र लगा कि भला नगाड़े बजाने से वह फँसा हुआ हाथी बाहर कैसे निकलेगा। जैसे ही युद्ध के नगाड़े बजने प्रारंभ हुए, वैसे ही उस मृतप्राय हाथी के हाव-भाव में परिवर्तन आने लगा।


पहले तो वह धीरे-धीरे करके खड़ा हुआ और फिर सबको हतप्रभ करते हुए स्वयं ही कीचड़ से बाहर निकल आया।

गौतम बुद्ध ने सबको स्पष्ट किया कि हाथी की शारीरिक क्षमता में कमी नहीं थी, आवश्यकता मात्र उसके अंदर उत्साह के संचार करने की थी।


"जीवन में उत्साह बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि मनुष्य सकारात्मक चिंतन बनाए रखे और निराशा को हावी न होने दें।

" कभी – कभी निरंतर मिलने वाली असफलताओं से व्यक्ति यह मान लेता है कि अब वह पहले की तरह कार्य नहीं कर सकता, लेकिन यह पूर्ण सच नहीं है

 

"सकारात्मक सोच ही आदमी को "आदमी" बनाती है...

और उसे अपनी मंजिल तक ले जाती है.. !!

रविवार, 18 अक्टूबर 2020

जाति औरत की

आज दुनिया कहॉ पहुंच चुकी है पर हम भारतवसी जाति और धर्म की पुछ पकड़े हुए है । जिसका सबसे ज्यादा फायदा राजनीतिक दलो ने उठाया है । क्या आपलोगो को नही लगता की अब जागने का समय आ गया है । क्या आज शिक्षा पर केवल ब्राह्मण जाति का अधिकार है, सेना मे केवल क्षत्रिय है या व्यपार पर बनियो का अधिकार है । देखने से तो ऎसा नही लगता । 


जाति क्या है इस पर एक महिला के विचार । 

एक आदमी ने महिला से पूछा......

          तम्हारी जाति क्या है?

महिला ने उल्टा ही पूछ लिया...

       एक मां की या एक महिला की

उसने कहा....चलो दोनों की बता दो.....

     और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान बिखेरी।

महिला ने भी पूरे धैर्य से बताया

            एक महिला जब माँ बनती है, तो वो जाति-विहीन हो जाती है,

उसने फिर आश्चर्य चकित होकर पूछा....

          वो कैसे..?

जबाब मिला कि .....

जब एक माँ अपने बच्चे का लालन पालन करती है,अपने बच्चे की गंदगी साफ करती है,

        तो वो शूद्र हो जाती है......

वो ही बच्चा जब बड़ा होता है तो माँ नकारात्मक ताकतों से उसकी रक्षा करती है,

       तो वो क्षत्रिय हो जाती है

जब बच्चा और बड़ा होता है,

                तो माँ उसे शिक्षित करती है,

 तब वो ब्राह्मण हो जाती हैऔर अंत में,

        जब बच्चा और बड़ा होता है तो माँ उसके आय और व्यय में उसका उचित मार्गदर्शन कर अपना वैश्य धर्म निभाती है                                                                                                                   

         तो अब बताओ कि......                                                                                                                                                                                                                                                                                               हुई ना एक महिला या मां जाति विहीन

      उत्तर सुनकर वो अवाक् रह गया।

उसकी आँखों में महिलाओं या माताओं के लिए सम्मान व आदर का भाव था,

और उधर उस महिला को अपने माँ और महिला होने पर पर गर्व का अनुभव हो रहा था।.                                                                                                                                                                                                      संसार की सभी महिलाओं को समर्पित🙏🏻  


प्रिय बन्धुओ

आपके लिये एक कविता जो मा को समर्पीत है

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ

सिंह की सवार बनकर

रंगों की फुहार बनकर

पुष्पों की बहार बनकर

सुहागन का श्रंगार बनकर

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ


खुशियाँ अपार बनकर

रिश्तों में प्यार बनकर

बच्चों का दुलार बनकर

समाज में संस्कार बनकर

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ


रसोई में प्रसाद बनकर 

व्यापार में लाभ बनकर 

घर में आशीर्वाद बनकर 

मुँह मांगी मुराद बनकर 

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ


संसार में उजाला बनकर 

अमृत रस का प्याला बनकर 

पारिजात की माला बनकर 

भूखों का निवाला बनकर 

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ


शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी बनकर 

चंद्रघंटा, कूष्माण्डा बनकर 

स्कंदमाता, कात्यायनी बनकर 

कालरात्रि, महागौरी बनकर 

माता सिद्धिदात्री बनकर 

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओ


तुम्हारे आने से नव-निधियां 

स्वयं ही चली आएंगी 

तुम्हारी दास बनकर

तुम्हारा स्वागत है माँ तुम आओl

     🌹जय माता दी 🌹 जय माता दी 🌹

        🙏🙏🙏🙏     🙏🙏🙏🙏

मंगलवार, 13 अक्टूबर 2020

भारतीय फिल्मीस्तान सच्चाई या दिखावा

प्रिय बन्धुओ 

भारतीय फ़िल्मिदुनिया चकाचॊध से भरी हुई हॆ । हम इनकी वास्त्वीकता के बारे मे कम ही जानते हॆ । हम जैसा फिल्मो मे और समाचार पत्रो मे देखते और सुनते हॆ वैसी छवी बना लेते हॆ । कुछ तो हमारे आदर्श बन जाते हॆ और हम उनकी पुजा तक करने लग जाते हॆ। कई कलाकार हॆ जो फिल्मो मे खलनायक का किरदार निभाते हॆ लेकिन वास्तव मे वे काफी सरल स्वभाव के हॆ ।





फिल्मे समाज की पसन्द के आधार पर बनती हॆ कि समाज देखना क्या चाहता हॆ ? 1950 से 1990 के दसक तक जो फिल्मे बनी उनमे अधिकान्श देशभक्ति और एस्मगलिङ्ग [ सोना, हीरा, ड्र्ग्स ] से जुड़ी थी । इससे हमे शिक्षा भी मिलती थी। इनमे भारतीय परम्पराओ, रिति रिवाजॊ का पुरा ध्यान रखा जाता था ।

सन २००० के बाद रोमानटीक फिल्मो का दौर शुरु हुआ। ये सिलसिला 2010 तक चला । यहा तक तो  ठीक था उसके बाद जो अश्लीलता का दौर शुरु हुआ वह आज तक जारी हॆ।





खॆर मेरा उद्देश्य इस समय किसी और बात पर चर्चा को लेकर हॆ वह हॆ इन कलाकरो का सामाजिक दायित्व। आज सभी कलाकार अच्छी खासी कमाई कर रहे हॆ क्या उनका दायित्व नही बनता की समाज की कुछ जिम्मेदारिया निभाये। जो पैसा उनको समाज से मिल रहा है उसक कुछ अन्श समाज पर खर्च करे।

चाहे वह हिन्दु कलाकार हो या मुसलमान, कोई इस फ़र्ज को निभाने के लिये तैयार नही है। फिल्मो मे आप गरिबो की मदद करके वाहवाहि बटोरते है, कही पोलिस बनकर तो कही वकील बनकर।





यह सच कि आज हर व्यक्ति अपनी सुख सुविधाओ और भविष्य को सुरक्षित रखने के लिये कमाता है किन्तु यह सही नही होगा कि अपनी कमाई का कुछ हिस्सा समाज की भलाई के लिये खर्च करे। अरे जिनके पास है वे तो दे ही सकते है।

यह भी सच है कि पैसे कि भूख मरते दम तक मिट्ने वाली नही है जैसे अमबानी की भूख। 

हमारे कलाकार जो पैसे गलत शॊको [ ड्रग्स] को पुरा करने के लिये खर्च करते है उसको तो समाज कि भलाई के लिये लगा ही सकते है। क्योकि आज उनकी वास्तविकता  हमारे सामने है। समाजसुधारक दिखने वाले ये लोग अन्दर से कितने खोखले है। कितनी बुराईयो को इन्होने पाल रखा है। 


रविवार, 11 अक्टूबर 2020

घर पर शिक्षा कैसे हो यह हमारी जिममेदारी








कोरेना काल मे जब सभी संंस्थाये बन्द कर दी गयी हॆ तब परिवार के हर सदस्य का यह फ़र्ज बन जाता हॆ कि वे बच्चो की पङाई लिखाई को पुरा कराये । एक जगह रहने परआपस मे कलह की समस्या आ सकती हॆ, बच्चे चिड़चिड़े हो सकते हॆ इसलिय़े आपको इसका ध्यान रखना होगा क्योकि वे तो छोटे हॆ ।

दूसरी महत्वपूण बात उनकी हर चिजो का समय निस्चित कर दे ताकि उन्हे बार-बार कहना न परे। सुबह, दोपहर और शाम के हिसाब से समय निस्चित करे।जैसे सुबह ८ से १०, दोपहर मे २ से ४ और शाम को ७ से ९ बजे तक। ४ से ६ बजे तक खेल का समय रखे यह आपके उपर निर्भर हॆ। प्र्यास करे की हर काम समय पर ही हो

आगे आपको रटने की जगह  पढने और समझने पर जोर देना होगा। पहले बच्चो को पुरा पाठ पढाये समझाये फिर याद कराये । पाठ के अन्दर से प्र्श्न बनाये। टेस्ट जरुर लेते रहे।

बच्चो को लिखने का बराबर अभ्यास भी कराये । वे लिखने से बचने की कोशिस करते हॆ ईसलिये मॊखिक के साथ साथ लिखित अभ्यस भी कराये।

अग्रेजी के साथ साथ हिन्दी पर भी जोर दे। वर्ड मिनिग पर पुरा ध्यान दे। एक सप्ताह बाद या पनद्र्ह दिनो बाद रिविजन कराये।

गुरुवार, 8 अक्टूबर 2020

झगरालु होत मानव समाज




 

क्या कारण है कि मानव विक्षिप्त हो रहा है। आज सभी उनके जीवन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कुछ लोगों को पैसे की समस्या है और कुछ को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। अगर आप हमारे आसपास देखते है, कोई खुश नहीं दिखेगा। 

खुशी क्या है ? दु: ख का अंत हो गया या कुछ कम हो गया। इसके बारे में कोई नहीं जानता। महात्मा बुद्ध ने कहा कि दुनिया दुखों से भरी है और हम इसे हरा सकते हैं केवल अच्छे आचरण से । मानव असीमित इच्छाओं के साथ जन्म लेता है। और पूरे जीवन उन्हें पूरा करने की कोशिश की।

दुःख का कारण हमारी अधूरी इच्छा है जो कभी पूरी नहीं हो सकती। जब एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरा हमारे सामने खड़ा होता है। इसलिए हमें इस अंधी दौड़ को छोड़ना होगा।

हर देश और हर व्यक्ति इस असीम दौड़ में भाग ले रहा है और इस दौड़ को जीतना चाहता है। लेकिन यह संभव नहीं है । हमें वास्तविक खुशी की खोज करने की कोशिश करनी चाहिए। हमें अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए। तब हमें वास्तविकता के बारे में पता चलेगा।

मॆॆ कोइ निराशावादी नही हू बल्कि चाह्ता हू कि हम सभी विकास की दौड मे जिन चीजो को भुलते जा रहे हे जैसे अपने संसकार, रिस्ते-नाते, परिवार आदि बहुत कुछ। परिवार और रिश्ते नाते कच्चे धागे की तरह हॆ जो एक बार टूटने के बाद जुर नही पाते ा हमे इिन्हे बचाना होगा ा 


मंगलवार, 6 अक्टूबर 2020

Casteism and Religion in Indian Politics




In every election, our leaders try to motivate people on the basis of caste and religion. It is not their fault but we are responsible for this thinking because we are badly involved in these matters.

In every country some issues play an important role in elections. In the same way casteism and religion play an important role in Indian Politics. Now We are educated but maximum Indians  does not ready to leave these matters. This is the reason, our leaders always take advantage through these thoughts. 
But now these beliefs have spread everywhere. Our society is become ready to divide on the basis of these matters. The roots of castism and religion become deeper.
It is necessary that we will try to give up that matters and think about other issues like development, education, unity and security.

सोमवार, 5 अक्टूबर 2020

Gender Equality or Unequality

Many times, I read in newspaper and hear through mass media about the incidents of violence against woman. In these cases, many are fraud cases. It files only to take revenge. At last Many dowry cases are proved wrong. These thoughts force me to think about Man's right. 

I am not against woman. This time everyone wants to prove himself as a feminist. But the reality is much different. It only becomes the medium of popularity.  


  This article take attention to this point. We think that It is correct time to make law in favor of  man. 

It is also true that woman suffered much violence from ancient times. So it is necessary to take some steps to the upliftment of woman. But the first step should be raise  woman herself. 



शनिवार, 3 अक्टूबर 2020

Reasons of Increasing Rape Incidents









                                                                                                                                                                                   

                                                                                                                                                                          What do you think about increasing rape incidents? In Indian culture, there are many restrictions between the relation of Boy and Girl or Man and Woman. These restrictions are arising many problems in our society. Our youth is not expressing his thoughts.

The second main reason is he availability of electronics like mobile and TV. This time they can see all types of materials. The boys belong to mannered family, have the ability to control their emotions. But on the other side the boys related to uncultured family have no control upon their emotions. All the times they wandering here and there without any reason. They are involved in unlawful activities.

On the other hand, peoples of western countries are open minded. In their culture women have the equal rights and they are independent.

So it is the time to think everyone about it.   



शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020

Our YOUTH and their Changing Behavior

Now today I want to discuss a major problem related to our children. It is related to their idle. I think that our ancient forefathers or freedom fighter are not their AADARSH. They are mostly affected by the criminal like person. They see only the one side of them like money, power and fear in society.  But they don’t see the dark side of their Idle. They don’t know what will be the end of this passion. They only attract their outer appearance. Where is our generation going? Think deeply about it.

The second major problem of this youth is related to their aggressive nature. The main cause of this problem is nuclear family. In joint family they felt themselves safe and secure. But this time joint family is less in number. Working parents is not spend much time with them. They have no time to discuss or understand their children’s problem. On the other side New generation wants friend like dad whose behavior is equal to them. They have no patience to bear the long lecture of his elders. They also wants space and respect

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2020

Modern India But Backward Indians

 Now this time, India is changing very fast. In every area, India is improving itself. It has a big market therefore every multinational company is trying to establish itself here, Every Indian is in changing process. They like to wear eastern clothes and food. Most of Indian wants to look like a Modern man. This is the only one aspects of our society.

BUT Increasing rape incident and bed behavior towards woman are showing the backwards mentality of Indians. ARE THEY REALLY BECOME MODERN? They are mentally sick man. They think that women are only the means of sex. They have no rights to become a part of society.

We think that maximum Indian does not know what is the real meaning of Modernization. It does not belong in clothes or food but it belongs in thoughts of high value. Mahatma Gandhi said that SIMPLE LIVING HIGH THINKING. We give-up narrow minded thoughts But we will adopt good conduct.         

सभी लौगौ कॊ मेरा