क्या कारण है कि मानव विक्षिप्त हो रहा है। आज सभी उनके जीवन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। कुछ लोगों को पैसे की समस्या है और कुछ को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है। अगर आप हमारे आसपास देखते है, कोई खुश नहीं दिखेगा।
खुशी क्या है ? दु: ख का अंत हो गया या कुछ कम हो गया। इसके बारे में कोई नहीं जानता। महात्मा बुद्ध ने कहा कि दुनिया दुखों से भरी है और हम इसे हरा सकते हैं केवल अच्छे आचरण से । मानव असीमित इच्छाओं के साथ जन्म लेता है। और पूरे जीवन उन्हें पूरा करने की कोशिश की।
दुःख का कारण हमारी अधूरी इच्छा है जो कभी पूरी नहीं हो सकती। जब एक इच्छा पूरी होती है, तो दूसरा हमारे सामने खड़ा होता है। इसलिए हमें इस अंधी दौड़ को छोड़ना होगा।
हर देश और हर व्यक्ति इस असीम दौड़ में भाग ले रहा है और इस दौड़ को जीतना चाहता है। लेकिन यह संभव नहीं है । हमें वास्तविक खुशी की खोज करने की कोशिश करनी चाहिए। हमें अपनी इच्छाओं को नियंत्रित करने का प्रयास करना चाहिए। तब हमें वास्तविकता के बारे में पता चलेगा।
मॆॆ कोइ निराशावादी नही हू बल्कि चाह्ता हू कि हम सभी विकास की दौड मे जिन चीजो को भुलते जा रहे हे जैसे अपने संसकार, रिस्ते-नाते, परिवार आदि बहुत कुछ। परिवार और रिश्ते नाते कच्चे धागे की तरह हॆ जो एक बार टूटने के बाद जुर नही पाते ा हमे इिन्हे बचाना होगा ा
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