रविवार, 29 नवंबर 2020

Sacche Deshbhakto ki kahani

 





“नवम गुरु का तेज ही पीढ़ी दर पीढ़ी जा सकता है 

कोई भगीरथ ही धरती पर गंगा को ला सकता है,

वे जो चारों जवाँ शेर दशमेश पिता के जाए थे, 

वे इस धरती को कुछ दिन सम्मान सिखाने आए थे,

मस्तक पर था स्वाभिमान नव-पौरूष भी बलिदानी था,

जिनकी नवल आयु के आगे युग-युग पानी पानी था,

याद रखेंगे बाबा ज़ोरावर फ़तह की पावन गाथा,

इंच इंच चिन गए मगर ना झुकने दिया हिंद का माथा,

वो अज़ीत बाबा जुझारू चमकौर गढ़ी पर वारे हैं,

चारों साहिबज़ादे दुनिया की आँखों के तारे हैं...!”🙏

                  🙏 ❤️इतिहास का विद्यार्थी होने के नाते व संत-परम्परा के प्रति अपरिमित आदर होने के कारण, पूज्य बाबा गुरू नानक देव जी के अमृत संदेशों को गहरे तक जानने, जीने का अवसर लगातार मिला और इसी परम्परा के अवगाहन के एक सिरे पर खड़े शस्त्र और शास्त्र के समान साधक दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी को भी प्रणाम करने का अवसर मिला ! बड़ा मन था कि कभी न कभी बाबा नानक देव जी व उनसे चलकर दशमेश पिता गुरू गोविंद सिंह  धार्मिक-कट्टरपंथियों व परदेस में बैठे राष्ट्रवाद के घोर दुश्मन ISI पोषित उनके खालिस्तानी पिट्ठुओं ने जिस तरह वर्चुअल गाली-गलौज की है व धमकियाँ दी हैं, मेरा अपयश फैलाया है, मेरे प्रति घृणा बोयी है तब से इन पुण्य अवसरों तक पर कुछ भी लिखते-पढ़ते बहुत संकोच सा होता है कि पता नहीं मेरी किस भोली श्रद्धा को ये पाक पालित पिस्सू अपने एजेंडा के लिए घृणा फैलाने के अवसर में बदल लें ? फ़ालतू में क्यूँ एक नए विवाद को जन्म दूँ ? दुख इस बात का भी होता है कि मेरी सोच को अंदर तक जानने वाले अन्य सिख बंधु भी इनके ऐसे एजेंडा युक्त दुष्प्रचार और गाली-गलौज पर डरकर या संकोच से चुप्पी साध जाते हैं !

अस्तु पूरे संसार को शांति, सद्भाव, मानवता और भाईचारे का युग-कल्याणकारी संदेश देने वाले संत गुरु नानक देव जी की जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएं! गुरपुरब के शुभ अवसर पर आज उल्लास और उत्सवों के बीच थोड़ा समय निकाल कर उन परम सन्त की जीवनी और उनके उपदेशों को भी ज़रूर पढ़ें। यक़ीन मानिए आज का दिन समाप्त होने तक आप एक बेहतर मनुष्य हो चुके होंगे। 🙏🏻


'वाहेगुरु जी दा खालसा, श्री वाहेगुरु जी दी फ़तेह'

स्वयं-मूल्यांकन पर हिंदी कहानी

 *ड्राईवर*



स्वयं-मूल्यांकन पर हिंदी कहानी


रामू एक बहुत ईमानदार और मेहनती युवक था। वह बहुत हंसमुख और मधुर स्वाभाव का व्यक्ति था। एक दिन रामू एक किराने की दुकान पर गया।


वहां सिक्का डालने वाला सार्वजनिक फ़ोन लगा था। रामू ने सिक्का डाला और एक नम्बर डायल किया।


 

ट्रिंग-ट्रिंग..ट्रिंग-ट्रिंग…. किसी ने फ़ोन उठाया।


रामू बोला, “ हेलो सर… नमस्ते, मैंने सुना था कि आपको एक ड्राईवर की आवश्यकता है। मैं भी एक ड्राईवर हूँ। क्या आप मुझे अपने यहाँ ड्राईवर की नौकरी देंगे ?”


व्यक्ति ने कहा “ बेटा, मेरे यहाँ पहले से ही एक ड्राईवर है। मुझे अन्य किसी ड्राईवर की आवश्यकता नहीं है।


रामू ने कहा “ सर, मैं एक अच्छा ड्राईवर होने के साथ- साथ एक ईमानदार इंसान भी हूँ। आपके यहाँ जो ड्राईवर है, मैं उससे भी कम तनख्वाह काम करने को तैयार हूँ।


“ बेटा, जो ड्राईवर मेरे यहाँ काम करता है, मैं उसके काम से खुश हूँ। बात पैसों की नहीं है, हम जैसा ड्राईवर चाहते हैं, वैसा हमारे पास हैं और हमें किसी अन्य ड्राईवर की जरूरत नहीं है।”, व्यक्ति ने समझाया।


रामू ने जोर देकर कहा, “ सर, मैं आपके यहाँ ड्राईवर का काम करने के साथ- साथ अन्य काम भी करूँगा, जैसे- बाज़ार से सब्जी लाना, आपके बच्चों को स्कूल छोड़कर आना, इत्यादि। मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि मैं आपको किसी भी शिकायत का मौका नहीं दूंगा। मुझे उम्मीद है कि अब आप मुझे मना नहीं करोगे।”


व्यक्ति बोला “ कहा न मुझे अभी किसी ड्राईवर की जरूरत नहीं है!” और ऐसा कहकर उसने फ़ोन काट दिया।


दुकानदार रामू की बात बहुत ध्यान से सुन रहा था। उसने रामू से कहा “मेरा बेटा शहर में रहता है। उसे एक अच्छे ड्राईवर की जरूरत है। अगर तुम कहो तो मैं तुम्हे नौकरी दिलवा सकता हूँ।”


रामू ने दुकानदार से कहा, “ आपके  सहयोग के लिए धन्यवाद ! पर मुझे नौकरी की कोई आवश्यता नहीं है।”


दुकानदार हैरानी से बोला “ लेकिन अभी तो तुम फ़ोन पर नौकरी पाने के लिए गिडगिडा रहे थे। अब क्या हुआ ? अब जब मैं तुम्हे घर बैठे ही नौकरी दिलवा रहा हूँ तो तुम मुझे नखरे दिखा रहे हो..भलाई का ज़माना ही नहीं रहा!”


रामू ने बड़ी विनम्रता के साथ कहा, “ आप मुझे गलत न समझिएगा। मुझे काम की कोई जरूरत नहीं है। दरअसल सच बात तो यह है कि, मैं अपने ही काम की परीक्षा ले रहा था। उस व्यक्ति के यहाँ काम करने वाला ड्राईवर और कोई नहीं, वो मैं ही हूँ।


दोस्तो, सफल जीवन जीने के लिए यह अत्यंत आवश्यक है, कि हम स्वयं को अच्छी तरह जाने। हम अपनी कमजोरियों और कमियों को पहचाने और जितनी जल्दी हो सके उन कमियों पर विजय प्राप्त करें।


यहाँ यह बात समझनी जरूरी है की कोई भी व्यक्ति हमें उतना बेहतर नहीं समझ सकता जितना कि हम खुद को समझ सकते है। स्वमूल्यांकन/self-evaluation एक ऐसी ही महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिसके द्वारा हम स्वयं ही स्वयं की परीक्षा लेते हैं,  और अपनी कमजोरियों या कमियों को जानने की कोशिश करते हैं। इसमें व्यक्ति को पूरी ईमानदारी के साथ खुद से पूछना चाहिए कि-


 

➡मैं जो काम कर रहा हूँ, क्या मैं उसे पूरी ईमानदारी के साथ कर रहा हूँ?

➡क्या मैं अपने काम में, अपना 100% योगदान दे रहा हूँ?

➡क्या मैं अपने काम को और बेहतर तरह से कर सकता हूँ?

➡क्या मैं अपनी कंपनी के लिए और उपयोगी साबित हो सकता हूँ?

➡इस स्वमूल्यांकन (self-evaluation) के द्वारा हम न केवल अपनी Professional life बेहतर बना सकते हैं, बल्कि जीवन के प्रत्येक क्षेत्र  (Professional , Personal and Social life ) में अपनी सफलता सुनिश्चित कर सकते हैं।


तो, आइये आज से, अभी से इस अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी कला को अपने जीवन का अभिन्न अंग बनायें, और पूरी ईमानदारी के साथ इसे अपने जीवन में अपनाकर अपनी सफलता सुनिश्चित करें

शनिवार, 7 नवंबर 2020

!! संयम का महत्व !

 !



संयम बड़़ा ही गूढ़ शब्द है अगर जीवन मे सफलता पानी है तो इसका साथ नही छोरना होगा । कइ बार असफलता का कारन सयम खोना होता है ।

 कहने को तो संयम बहुत ही छोटा सा शब्द है पर समझने को बहुत ही बड़ा है। आज मैं आपको एक छोटी सी घटना का उल्लेख कर रहा हूँ, जो समझ गया, समझो जीवन का गूढ़ रहस्य समझ गया और जो न समझ सका उसे ईश्वर ही सदबुद्धि दें।

एक देवरानी और जेठानी में किसी बात पर जोरदार बहस हुई और दोनों में बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का मुँह तक न देखने की कसम खा ली और अपने-अपने कमरे में जा कर दरवाजा बंद कर लिया। परंतु थोड़ी देर बाद जेठानी के कमरे के दरवाजे पर खट-खट हुई। जेठानी तनिक ऊँची आवाज में बोली कौन है, बाहर से आवाज आई दीदी मैं! जेठानी ने जोर से दरवाजा खोला और बोली अभी तो बड़ी कसमें खा कर गई थी। अब यहाँ क्यों आई हो ?


देवरानी ने कहा दीदी सोच कर तो वही गई थी, परंतु माँ की कही एक बात याद आ गई कि जब कभी किसी से कुछ कहा सुनी हो जाए तो उसकी अच्छाइयों को याद करो और मैंने भी वही किया और मुझे आपका दिया हुआ प्यार ही प्यार याद आया और मैं आपके लिए चाय ले कर आ गई।


बस फिर क्या था दोनों रोते रोते, एक दूसरे के गले लग गईं और साथ बैठ कर चाय पीने लगीं। जीवन में क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता, बोध से जीता जा सकता है। अग्नि अग्नि से नहीं बुझती जल से बुझती है।


शिक्षा:-

समझदार व्यक्ति बड़ी से बड़ी बिगड़ती स्थितियों को दो शब्द प्रेम के बोलकर संभाल लेते हैं। हर स्थिति में संयम और बड़ा दिल रखना ही श्रेष्ठ है।

सभी लौगौ कॊ मेरा