“नवम गुरु का तेज ही पीढ़ी दर पीढ़ी जा सकता है
कोई भगीरथ ही धरती पर गंगा को ला सकता है,
वे जो चारों जवाँ शेर दशमेश पिता के जाए थे,
वे इस धरती को कुछ दिन सम्मान सिखाने आए थे,
मस्तक पर था स्वाभिमान नव-पौरूष भी बलिदानी था,
जिनकी नवल आयु के आगे युग-युग पानी पानी था,
याद रखेंगे बाबा ज़ोरावर फ़तह की पावन गाथा,
इंच इंच चिन गए मगर ना झुकने दिया हिंद का माथा,
वो अज़ीत बाबा जुझारू चमकौर गढ़ी पर वारे हैं,
चारों साहिबज़ादे दुनिया की आँखों के तारे हैं...!”🙏
🙏 ❤️इतिहास का विद्यार्थी होने के नाते व संत-परम्परा के प्रति अपरिमित आदर होने के कारण, पूज्य बाबा गुरू नानक देव जी के अमृत संदेशों को गहरे तक जानने, जीने का अवसर लगातार मिला और इसी परम्परा के अवगाहन के एक सिरे पर खड़े शस्त्र और शास्त्र के समान साधक दशमेश पिता गुरु गोविंद सिंह जी को भी प्रणाम करने का अवसर मिला ! बड़ा मन था कि कभी न कभी बाबा नानक देव जी व उनसे चलकर दशमेश पिता गुरू गोविंद सिंह धार्मिक-कट्टरपंथियों व परदेस में बैठे राष्ट्रवाद के घोर दुश्मन ISI पोषित उनके खालिस्तानी पिट्ठुओं ने जिस तरह वर्चुअल गाली-गलौज की है व धमकियाँ दी हैं, मेरा अपयश फैलाया है, मेरे प्रति घृणा बोयी है तब से इन पुण्य अवसरों तक पर कुछ भी लिखते-पढ़ते बहुत संकोच सा होता है कि पता नहीं मेरी किस भोली श्रद्धा को ये पाक पालित पिस्सू अपने एजेंडा के लिए घृणा फैलाने के अवसर में बदल लें ? फ़ालतू में क्यूँ एक नए विवाद को जन्म दूँ ? दुख इस बात का भी होता है कि मेरी सोच को अंदर तक जानने वाले अन्य सिख बंधु भी इनके ऐसे एजेंडा युक्त दुष्प्रचार और गाली-गलौज पर डरकर या संकोच से चुप्पी साध जाते हैं !
अस्तु पूरे संसार को शांति, सद्भाव, मानवता और भाईचारे का युग-कल्याणकारी संदेश देने वाले संत गुरु नानक देव जी की जयन्ती की हार्दिक शुभकामनाएं! गुरपुरब के शुभ अवसर पर आज उल्लास और उत्सवों के बीच थोड़ा समय निकाल कर उन परम सन्त की जीवनी और उनके उपदेशों को भी ज़रूर पढ़ें। यक़ीन मानिए आज का दिन समाप्त होने तक आप एक बेहतर मनुष्य हो चुके होंगे। 🙏🏻
'वाहेगुरु जी दा खालसा, श्री वाहेगुरु जी दी फ़तेह'
